Sunday, March 22, 2015

वक़्त और जीवन के बीच संवाद

मैं ठहरता हूँ जब तुम हौंसलों से गले मिलते हो। तब धीमे चल स्मृतियों के पटल पर ला बिखेरता हूँ वो दृश्य जिनमें कोपलें बरगद हुईं और धूल बने पर्वत धरती चाँद बनी और तारे हुए सूरज। तुम्हारी खुशियों में मल्हार सा झूमता संग तुम्हारे नभ को भी चूमता अनुभव को त्याग कर फिर बहता यूँ कि जैसे कभी थमा ही नहीं। तुम्हारे दुःख में साँस मेरी भी छूटती लहूलुहान रेंगती, चिल्लाती, टूटती। फिर चुपके एक क्षण में, उम्मीद का अंकुर बोता यूँ जीता कि जैसे कभी मरा ही नहीं। जिंदा एहसास कर, बाँहों में कस मुझे तुम चलते जीवन से शून्य की ओर टहलते मेरे असंख्य जीवों से प्रेम पर तुम बिलखते यूँ कि सब जान तुम कुछ मानते ही नहीं। यूँ कि सब जान तुम कुछ मानते ही नहीं, कि फिर तुम धरती चीर आओगे कि जीवन-मृत्यु की चिंता त्याग प्रेम करोगे, यूँ कि जैसे फिर कभी बिछड़ोगे ही नहीं।

Monday, February 23, 2015

Whispers of love

I miss you,
when woven with fierce flames of love,
my memory turns alive,
to get lost soon in thoughts
like always, not to survive.

I miss you,
on a child's smile for no cause.
Like jasmine in your bright hair
born to die soon,
you come and disappear.


I miss you
like a cobra in sunny desert,
mad with the God and human,
and sure of finding solace
in shade of her lady’s bosom.

I miss you,
when darkness creeps into the room,
and speaks the language of your charms.
It waters the seed of the dream,
where I sleep naked in your arms.

I promise.
I promise to grasp you,
with all my might.
And wash away all my fears,
of you drifting from sight.
My heart will sing a hymn
on the union of eternal love.
For I know that passionate hearts
have often pulled Gods to earth.
Lord! I don’t seek you,
It’s she who is enough.

Oh, yes! I wouldn’t let you depart
this one more time.
This time, the fragrance would stay,
and my fate would not betray.



Sunday, February 15, 2015

उठ कर

चलो झूठ को सच, 
और सच को वहम मान लेते हैं। 
एक दिवास्वप्न में रह
यथार्थ को झुठला,
भ्रम मान लेते हैं। 
रिश्तें जो हैं,
उनको छदम् मान लेते हैं।
आशाओं की शाख से गिरे
हौंसलों की हार को
जीत की ओर एक कदम मान लेते हैं।
चलो झूठ को सच,
और सच को वहम मान लेते हैं।